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class 12 psychology notes, solution in hindi 2022 ( 1.मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नता )

class 12 psychology notes, solution in hindi 2022 ( 1.मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नता )

Psychology Class 12 Chapter 1 notes in Hindi 

class 12 psychology notes in Hindi

1.मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नता

NCRT Class 12th Psychology : Subjective Questions Answers, Notes Pdf

Hello Dear Student , इस पोस्ट में हम NCERT Class 12 Psychology Notes in Hindi देने जा रहे हैं . आप किसी भी बोर्ड के स्टूडेंट हो ये सभी क्वेश्चन आपके लिए मददगार साबित होगा। चाहे आप Class 12th Bihar Board से हो या Class 12th Jharkhand Board  से या किसी अन्य बोर्ड से। इस पोस्ट में Ncert Psychology Notes in Hindi  दिया गया हैं। उम्मीद है ये नोट्स आपके तैयारी में चार चाँद लगाएंगे .Psychology Notes in Hindi को Psychology Question Answer के रूप में दिया गया हैं ताकि आप समझ सके की क्वेश्चन किस तरीके से एग्जाम में पूछा जा सकते हैं । class 12 psychology notes in Hindi

Q.व्यक्तिगत विभिन्नता से आप क्या समझते हैं ?

ANS-व्यक्तिगत विभिन्नता :- व्यक्तिगत विभिन्नता का अर्थ हैं , व्यक्तियों की विशेषताओं तथा व्यवहार के स्वरुप में पाया जाने वाला विशिष्ट तथा विचलनशीलता।

Q.मानव गुणों में पाया जाने वाला व्यक्तिगत विभिन्नता निम्नलिखित हैं।

ANS- 1.शारीरिक गुण एवं बनावट :-व्यक्तियों के शारीरिक गुण एवं बनावट में काफी विभिन्नता देखे जाती हैं। जैसे कोई व्यक्ति गोरा, या काला , मोटा या पतला।

2.बुद्धि:- व्यक्तियों की बुद्धि में काफी विभिन्नता पायी जाती हैं। कोई व्यक्ति मंद बुद्धि वाला होता है तो कोई सामान्य बुद्धि या प्रखर बुद्धि वाला होता हैं।

3.अभिक्षमता :- व्यक्तियों की अभिक्षमता में भी काफी विभिन्नता पायी जाती हैं। जैसे कोई व्यक्ति अच्छा इंजीनियर हो सकता हैं और दूसरा नहीं। यह इस बात पर निर्भर करता हैं की उसमे आवश्यक अभिक्षमता हैं की नहीं।

4.अभिरुचि :- व्यक्तियों की अभिरुचि में काफी विभिन्नता पायी जाती हैं। जैसे एक व्यक्ति की अभयरुचि विज्ञानं में हैं तो दूसरी की रूचि वाणिज्य या कला मे हैं।

5.व्यक्तित्व :- एक व्यक्ति का व्यक्तित्व दूसरे व्यक्तित्व से काफी अलग होता हैं। उनके अपेक्षाकृत स्थानीय विशेषताओ में अंतर पाया जाता हैं। जैसे कोई व्यक्ति शांत प्रकृति का होता हैं तो दूसरा चंचल एवं प्रसन्नचित प्रविर्ती का।

6.मूल्य :- व्यक्तियों के मूल्य में भी अन्तर पाया जाता हैं। उनके आदर्श एक दूसरे से भिन्न होते हैं। उनके सामाजिक आर्थिक एवं धार्मिक मूल्य में भी विभिन्नता पायी जाती हैं।

Q.व्यक्तिगत गुणों की मूल्यांकन करने की प्रमुख विधि की संक्षेप में चर्चा करे।

ANS-मूल्यांकन करने की निम्नलिखित विधि हैं।

1.शारीरिक एवं चिकित्सा सम्बन्धी जाँच :- व्यक्तियों के शारीरिक विभिन्नताओ की जाँच करने की अनेक प्रविधियां हैं।

2.व्यक्ति अध्ययन :- इस विधि के द्वारा व्यक्तियों के मनोसामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक गुणों का अध्ययन गहनता से किया जाता हैं। उनके विभिन्न तरह के गुणों के विकाश के बारे मनोवैज्ञानिक इतिहास तैयार किया जाता हैं। इस विधि का उपयोग ज्यादातर नैदानिक उदेश्य से किया जाता हैं।

3.प्रेक्षण :- व्यक्ति के जीवन में घटित घटनाओ का इस विधि से अध्ययन कर उनका व्यवस्थित वस्तुनिष्ठ एवं संगठित विवरण तैयार किया जाता हैं।

4.आत्म प्रतिवेदन :- इस विधि का उपयोग ज्यादातर व्यक्ति स्वयं के सन्दर्भ में सूचना देने में करता हैं।

5.साक्षात्कार :- इस विधि में प्रेक्षणकर्ता व्यक्ति से प्रश्न पूछ कर सूचनाएं एकत्रित करता हैं।

6.मनोवैज्ञानिक परिक्षण :- मनोवैज्ञानिक परिक्षण का उपयोग विशेषकर बुद्धि , अभिक्षमता , व्यक्तित्व , अभिरुचि एवं मूल्यों को पता लगाने में किया जाता हैं।

Q.बुद्धि का क्या तात्पर्य हैं ?

ANS- वेस्लर के सब्दो में , व्यक्ति द्वारा किसी उद्द्श्य की पूर्ति के लिए कार्य , तर्कपूर्ण चिंतन करने तथा अपने वातावरण के साथ प्रभावपूर्ण तैरके से अभियोजन करने की सार्वभौम क्षमता को ही बुद्धि कहते हैं।

Q.सांवेगिक बुद्धि किसे कहते हैं ?

ANS- सांवेगिक बुद्धि :- यह बुद्धि के भावनात्मक पक्ष से सम्बंधित हैं। अपने एवं दूसरे के संवेगो को समझने नियमित करने , उनके प्रकटीकरण , मुल्यांकन एवं नियंत्रण को सांवेगिक बुद्धि कहते हैं। सर्वप्रथम 1990 में सैलवे तथा मेयर ने सांवेगिक बुद्धि को परिभाषित किया था।

Q.व्यावहारिक बुद्धि किसे कहते हैं ?

ANS- व्यावहारिक बुद्धि का उपयोग मनुष्य अपने जीवन की समस्याओ का समाधान करने में करता हैं। सामाजिक परिवेश या जीवन में मनुष्य के सामने अनेक समस्या आती हैं। जिनका समाधान करने का वह प्रयास करता हैं। व्यावहारिक बुद्धि इसमें मदद करती हैं। जिस व्यक्ति में व्यावहारिक बुद्धि जितना अधिक होगा वह व्यक्ति उतना ही जल्द अपनी समस्या का संधान कर पायेगा।

Q.आध्यात्मिक बुद्धि किसे कहते हैं ?

ANS- आध्यात्मिक बुद्धि का सम्बन्ध आवश्यक रूप से धरम से नहीं हैं। यह मनुष्य के जीवन के अर्थ एवं मूल्यों से संबधित हैं और व्यक्ति इनसे जुड़ी हुई समस्यांओ का समाधान ढूंढता हैं इसके द्वारा व्यक्ति अपने जीवन को अधिक व्यापक , समृद्ध एवं सार्थक बना पता हैं। वह अपने जीवन का मुल्यांकन कर अपने लिए जीवनमार्ग ढूंढ लेता हैं जो उसके लिए अर्थपूर्ण एवं महत्वपूर्ण हैं।

Q.भारतीय दृष्टिकोण में कितने क्षमताओ को बुद्धि के अंतर्गत स्वीकार किया जाता हैं ?

ANS-भारतीय दृष्टिकोण में निम्नलिखित क्षमता को बुद्धि के अंतर्गत सवीकार किया जाता हैं।

1.संज्ञानात्मक क्षमता :- यह संवेदनशीलता , विभेदन करने , समस्याओं का समाधान करने और प्रभावकारी संप्रेषण की क्षमता से हैं।

2.सामाजिक क्षमता :- इस क्षमता का सम्बन्ध सामाजिक नियमो का पालन करने , माता पिता और अन्य पूजनीय लोगो का आदर करने , उनकी सेवा करने और उनकी आज्ञा का पालन करने से हैं ।

3.भावनात्मक क्षमता :- इस क्षमता का सम्बन्ध अपनी भावनावो पर नियंत्रण करने , यथार्थवादी आत्म मुल्यांकन करने , अच्छा आचरण , विनम्रता एवं ईमानदारी से हैं।

4.कार्यप्रेरण या उद्यमी क्षमता :- इस क्षमता का सम्बन्ध लक्ष्योन्मुख व्यवहार करने , तत्परता , प्रतिबद्धता एवं कठोर व्यवहार से हैं।

कहने का तात्पर्य है की भारतीय दृष्टिकोण में बुद्धिमान व्यक्ति वह हैं जिसमे उपर्युक्त चार क्षमताएं अधिक मात्रा में पायी जाती हैं।

Q.तकनिकी बुद्धि किसे कहते हैं ?

ANS- तकनिकी रूप से विकसित समाज में व्यक्ति ऐसे बाल – पोषण रीतियाँ अपनाते हैं , जिससे बच्चे में सामान्यीकरण तथा अमूर्तिकरण गति ,न्यूनतम प्रयास करने तथा मानसिक स्तर पर वस्तुओं का प्रहतन करने की कीक्षमता विक्सित हो सकते। ऐसे समाज बच्चे एक विशेष प्रकार के व्यवहार के विकाश को बढ़ावा देते हैं , जिसे तकनिकी बुद्धि भी कहते हैं।

Q.संकलित बुद्धि किसे कहते हैं ?

ANS- तकनिकी बुद्धि के संप्रत्यय के विपरीत भारतीय परंपरा में बुद्धि को जिस प्रकार समझा जाता हैं , उसे समाकलित बुद्धि कहते हैं , जिसमे समाज तथा संपूर्ण वैशविक पर्यावरण से व्यक्ति के संबधों को अधिक महत्व प्रदान किया जाता हैं।

Q.बुद्धि के एक कारक सिद्धांत की व्याख्या करे।

ANS- बुद्धि के एक कारक सिद्धांत का प्रतिपादन अल्फ्रेड बिने ने किया था। बिने द्वारा दिया गया सिद्धांत बहुत ही सरल प्रकार का हैं। क्योंकि इस सिद्धांत की खोज अत्यधिक बुद्धिमान और काम बुद्धिमान व्यक्तिओं की अलग अलग पहचान करने के प्रयास के अंतर्गत हुई हैं। इसीलिए बिने ने बुद्धि को योग्यताओ का समुच्य माना हैं जिसका उपयोग व्यक्ति पर्यावरण में स्थित किसी एक अथवा समस्त समस्यांओ के समाधान के लिए कर सकता हैं।

उनका यह सिद्धांत बुद्धि के एक कारक सिद्धांत के रूप में जाना जाता हैं।

Q.बुद्धि के द्वि कारक सिद्धांत के बारे में बतावे।

ANS- 1927 में चार्ल्स स्पीयरमैन ने बुद्धि के द्वि कारक सिद्धांत प्रस्तावित किया था। यह सिद्धांत कारक विश्लेषण की सांख्यकीय विधि पर आधारित था। उन्होंने प्रदर्शित किया की बुद्धि के अंतर्गत कुछ सामान्य कारक तथा कुछ विशिष्ट कारक होते हैं।

Q.मनोगतिक उपागम क्या हैं ?

ANS- मनोगतिक उपागम में बुद्धि को अनेक प्रकार की योग्यताओ का समुच्चय माना जाता हैं। यह व्यक्ति द्वारा किये जाने वाले निष्पादन को उसकी संज्ञानात्मक योग्यताओं के एक सूचकांक के रूप में व्यक्त करता हैं।

Q.सामूहिक एवं वैयक्तिक बुद्धि परिक्षण से आप क्या समझते हैं ?

ANS-1.व्यक्तिक परीक्षण :- जो एक ही समय में एक ही व्यस्क अथवा बच्चे पर किये जाते हैं , उसे व्यक्तिक बुद्धि परीक्षण कहते हैं।

व्यक्तिक परिक्षण दो प्रकार के होते हैं – 1.वाचिक 2.क्रियात्मक

2.सामूहिक परिक्षण :- ऐसा परिक्षण जो किसी एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि एक ही समय में एक से अधिक व्यक्ति पर प्रयोग में लाया जाये , उसे सामूहिक परिक्षण कहते हैं।


सामूहिक परिक्षण भी दो प्रकार के होते हैं – 1.वाचिक 2.क्रियात्मक


Q.गार्डनर के बुद्धि के प्रकार की चर्चा करे।

अथवा

बहुबुद्धि सिद्धांत कसिने प्रतिपादित किया था ? इसके प्रकारो के नाम बताएं।

अथवा

गार्डनर के द्वारा पहचान की गयी बहुबुद्धि की चर्चा संक्षेप में करे।

ANS-बहुबुद्धि का सिद्धांत गार्डनर के द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इनके अनुसार बुद्धि कोई एक तत्व नहीं हैं। बल्कि कई भिन्न भिन्न प्रकार की बुद्धियों का अस्तित्व होता हैं। और सभी बुद्धि दूसरे से अलग अलग तरीके से कार्य करती हैं।

गार्डनर के अनुसार निम्नलिखित 8 प्रकार की बुद्धि होती हैं।


1.भाषिक बुद्धि :- यह अपने विचार प्रकट करने तथा दूसरे व्यक्तियों के विचारो को समझने हेतु प्रवाह तथा नम्यता के साथ भाषा का उपयोग करने की क्षमता हैं। जिन व्यक्तियों में बुद्धि होती हैं वे शब्द कुशल होते हैं।


2.तार्किक गणितीय बुद्धि :- इस बुद्धि का समबन्ध आंकिक समस्यांओ से हैं। इसमें तर्क एवं प्रतीकों का उपयोग अमूर्त रूप से व्यक्ति करता हैं।


3.देशगत बुद्धि :- इस बुद्धि का उपयोग तृतीया अयं के प्रत्यक्षीकरण में होता हैं , अंतरिक्ष या समुद्री यात्रा में , मानसिक प्रतिभा के निर्माण एवं रूपांतर के लिए इसका उपयोग किया जाता हैं।


4.संगीतपरक बुद्धि :- इस बुद्धि का प्रदर्शन संगीत तारत्व में उतर चढ़ाव संगीत निर्माण और इसको परखने , गायन एवं वाद्ययंत्र बजने में देखा जा सकता हैं। यह संगीतज्ञ , नृत्यकला में निपुण लोगो गायक के लिए आवशयक हैं।


5.शारीरिक गति संवेदनापरक बुद्धि :- यह बुध सूक्षम मांसपेशीय गति के लिए आवश्यक हैं। कौशल एवं निपुणता से सम्बंधित हैं। इसकी आवश्यकता खेलकूद , शल्यक्रिया शिल्प रचना एवं नृत्य में निपुणता प्रपात करने के लिए आवशयक हैं।


6.अंतर्वैयक्तिक बुद्धि :- इस बुद्धि की आवश्यकता दूसरे व्यक्तियों की प्रेरणाओं इच्छाओ एवं भावनावो तथा क्रियाओ को समझने की क्षमता से सम्बंधित हैं। इस बुद्धि का उपयोग राजनीतिज्ञ , शिक्षकों एवं धरम प्रचारकों द्वारा की जाता हैं।


7.वैयक्तिक बुद्धि :- इस बुद्धि का समबन्ध स्वयं या अपने आपको समझने एवं अपनी पहचान समबन्धी ज्ञान को विकसित करने से हैं।


8.प्रकृतिकविषयक बुद्धि :- इस बुद्धि का उपयोग वनस्पति एवं पशुओ की पहचान और उनमे विभेद करने में की जाती है। इस प्रकार की बुद्धि किसानो, शिकारियों , जीव विज्ञानं के विधर्थियों एवं पर्यटक के लिए आवश्यक हैं।

Q.किस प्रकार त्रिपाचिय सिद्धांत बुद्धि को समझने में हमारी मदद करता हैं ?

अथवा

स्टर्नबर्ग के त्रितत्वीय सिद्धांत की चर्चा कीजिये।


ANS- स्टेनबर्ग ने 1985 में बुद्धि के एक सिद्धांत को प्रतिपादित किया था जिसे बुद्धि का त्रितत्वीय सिद्धांत कहते हैं। इस सिद्धांत के द्वारा समस्या समाधान में निहित संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को समझने के लिए उपयोग किया जाता हैं। इन बुद्धि के तीन घटक होते हैं।


1.घटकीय बुद्धि :- घटकीय या विश्लेषणात्मक बुद्धि द्वारा व्यक्ति किसी समस्या का समाधान करने के लिए प्रपात सूचना का विश्लेषण करता हैं। इस बुद्धि की अधिक मात्रा रखने वाले लोग विश्लेषणात्मक तथा आलोचनात्मक ढंग से सोचते हैं। और विद्यालय में सफलता प्राप्त करते हैं।। इस बुद्धि के भी तीन अलग अलग घटक होते हैं। जो अलग अलग कार्य करते हैं।


ज्ञानार्जन

अधि

निष्पादन

2.आनुभविक बुद्धि :- आनुभविक या सर्जनतमक बुद्धि वह बुद्धि हैं जिसके द्वारा व्यक्ति किसी नयी समस्याओं के समाधान हेतु अपने पूर्व अनुभवों का सर्जनात्मक रूप से उपयोग करता हैं। यह बुद्धि सर्जनात्मक निष्पादन में प्रदर्शित होता हैं।


3.सन्दर्भिक बुद्धि :- सन्दर्भिक या व्यावहारिक बुद्धि वह बुद्धि हैं जिसके द्वारा व्यक्ति अपने दिन प्रतिदिन के जीवन में आने वाले पर्यावरणीय समस्याओं से निपटता हैं। इसे व्यावहारिक बुद्धि या व्यावसायिक बुद्धि भी कहते हैं।


Q.पास सिद्धांत की व्याख्या करे।


ANS- बुद्धि के पास मॉडल को 1994 में दास नागलिरि एवं किर्बी के द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इसे दास के नियोजन , अवधान समाकलित तथा अनुक्रमिक मॉडल से भी जानते हैं। इस मॉडल के अनुसार बौद्धिक क्रियाएं अन्योन्याश्रित तीन तंत्रिकीय या स्नायुषिक तंत्रो की क्रियाएं द्वारा सम्पादित होते हैं। इन तीन तंत्रो को ही मस्तिष्क की तीन क्रियात्मक इकाई कहा जाता हैं।


ये तीन इकाई निम्नलिखित हैं –


1.भाव प्रबोधन /अवधान :- हमारे मस्तिष्क में भाव प्रबोधन एवं अवधान के लिए उत्तरदायी स्नायविक तंत्र के द्वारा स्मृति , मनोभाव और प्रतीकात्मक अनुक्रिया होती हैं। भाव प्रबोधन किसी भी क्रिया या व्यवहार का मूल आधार होता हैं। यह हमें एक निश्चित दिशा में ध्यान देने के लिए बाध्य करता हैं। अवधान चयनात्मक मानसिक क्रिया हैं। जिसके कारन हम वातावरण के हमारे उदेश्य या लक्ष्य से समबधित उत्तेजनावो में से एक को चुन लेते हैं , जो हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में सबसे ज्यादा सहायता करती हैं।


2.समाकलित एवं अनुक्रमिक प्रकरण :- यह दो ऐसी अनुक्रिया हैं , जो हमारे मस्तिष्क के श्रवण दृष्टि एवं पृष्ठ खंडो से संबधित हैं और यह हमें वातावरण की उत्तेज़नाओ को अर्थपूर्ण ढंग से समझने में मदद करती हैं। इसके द्वारा हम विभिन उत्तेज़नाओ का एकीकरण कर लेते हैं।


3.नियोजन :- नियोजन की प्रक्रिया का केंद्र हमारे मस्तिष्क के अग्रखंड हैं। यह अनुक्रिया हमारे उद्देश्य या लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रणनीति बनाने से समबधित हैं। इसके द्वारा हम वातावरण के लक्ष्य से संबधित विभिन्न उत्तेजनाओं पर ध्यान देने के बाद उनमे से किसी एक को ही चुन लेते हैं , जो हमारे लक्ष्य की प्राप्ति में सबसे ज्यादा प्रभावपूर्ण ढंग से करने में सहायता करती हैं ।


Q.सामान्य वक्र किसे कहते हैं ?


ANS- बुद्धि लब्धि प्राप्तांको का यदि एक आवृति बनाया जाये तो यह लगभग एक घंटाकर वक्र के सदृश होता हैं। इस वक्र को सामान्य वक्र भी कहा जाता हैं ।


Q.बुद्धि पर संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ता हैं ?


अथवा

ANS- संस्कृति , रीती रिवाज , विश्वासों , अभिवृतिया तथा कला और साहित्य में उपलब्धियां की एक सामूहिक व्यवश्था को कहते हैं । इन सांस्कृतिक प्रचालो के अनुरूप ही किसी व्यक्ति की बुद्धि के ढलने की संभावना होती हैं। स्टेनबर्ग के सन्दर्भिक अथवा व्यावहारिक बुद्धि का अर्थ हैं की बुद्धि संस्कृति का उत्पाद हैं।


वाइगोस्टी का भी विश्वास था की व्यक्ति की तरह संस्कृति का भी अपन एक जीवन होता हैं। संस्कृति का भी विकाश होता हैं और उसमे भी परिवर्तन होते हैं।


इसी प्रक्रिया में सस्कृति ही यह निर्धारित करता हैं की अंततः किसी व्यक्ति का बौद्धिक विकाश किस प्रकार होगा।

वाइगोस्टी के अनुसार कुछ प्रारंभिक मानसिक प्रक्रियाएं ( जैसे रोना , सूंघना , चलना , दौड़ना आदि ) सर्वव्यापी होती हैं। परतुं उच्च मानसिक प्रक्रियां जैसे समस्या का समाधान करने तथा चिन्तन करने आदि की शैलिया मुख्यतः संस्कृति का प्रतिफल हैं।

Q.बुद्धि लब्धि क्या हैं ? और यह कैसे निर्धारित की जाती हैं ?


ANS- बुद्धि लब्धि :- 1912 ईस्वी में एक जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न ने बुद्धि लब्धि का संप्रत्यय विक्सित किया था।


किसी व्यक्ति की मानसिक आयु को जब उसकी वास्तविक आयु से भाग दिया जाता हैं और उसको 100 से गुना करने से बुद्धि लब्धि पर्पट होती हैं ।


 


बुद्धि लब्धि वर्गीकरण जनसख्याँ %

130 अधिक अतिश्रेष्ठ 2.2

120-130 श्रेष्ठ 6.7

110-119 उच्च औसत 16.1

90-109 औसत 50.1

80-89 निम्न औसत 16.1

70-79 सीमावर्ती 6.7

70 से कम चुनौतीग्रस्त 2.2

 


Q.बुद्धि लब्धि में परिवर्तन के क्या क्या कारण हो सकते हैं ?


ANS- बुद्धिलब्धि में परिवर्तन के कई कारण हो सकते हैं।


इन कारणों को हम मुख्यता दो भाग में बाँट सकते हैं।


1.अनुवांशिक

2.वातावरण संबंधी


बुद्धि लब्धि में परिवर्तन इन दो कारणों से होता हैं ऐसे मनोवैज्ञानिक ने साबित कर दिया हैं।


Q.सर्जनात्मकता से आप क्या समझते हैं ?


ANS- स्टेन के अनुसार जब किसी कार्य का परिणाम नवीन हो और किसी समय में समूह के लिए उपयोगी हो तो इसे सृजनात्मकता कहते हैं।


Q.सर्जनात्मकता के कौन कौन से तत्व हैं ?


ANS- गिल्फोर्ड के अनुसार सर्जनात्मकता के चार तत्व हैं –


1.तात्कालिक स्थिति से परे जाने की योग्यता :- जब व्यक्ति वर्त्तमान परिस्थिति से हटकर उससे आगे सोचता हैं और चिंतन करता हैं तो यह सर्जनात्मकता हैं।


2.समस्या का पुनर्व्याख्या :- सर्जनात्मकता का दूसरा तत्व समस्या का पुनर्व्याख्या करना हैं , यह अध्यापक , नेता एवं वकील के कार्यों में पाया जाता हैं।


3.सामंजस्य :- जब कोई बच्चा और व्यक्ति अपने विचारो एवं तथ्यों के बिच सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम होता हैं , तब इसे सृजनात्मकता कहते हैं।


Q.अभिक्षमता का क्या अर्थ हैं ?


ANS- अभिक्षमता का अर्थ किसी व्यक्ति की कौशल के अर्जन के लिए अन्तर्निहित संभाव्यता से हैं। अभिक्षमता परिक्षण का उपयोग यह पूर्वकथन करने में किया जाता हैं की व्यक्ति उपर्युक्त प्रशिक्षण प्रदान करने पर कैसे निष्पादन कर सकेगा।


Q.प्रतिभाशाली का क्या अर्थ हैं ?


ANS- हालिंगवर्थ के अनुसार प्रतिभाशाली की योग्यता और क्षमता अपने आयु स्तर के बालको से श्रेष्ठ होती हैं। ये लोग किसी कार्य को साधारण बालको की तुलना में जल्दी कर लेते हैं। ऐसे बालको को अपनी योग्यता के कारण औसत बालको के साथ अभियोजन में समस्या होती हैं।

Q.प्रतिभाशाली बालको की क्या विशेषता होती हैं ?


ANS- प्रतिभाशाली बालको की निम्न विशेषता होती हैं।


1.उन्नत तार्किक चिंतन , प्रश्न पूछने की प्रविर्ती तथा समस्या समाधान की अधिक योग्यता।


2.सामान्यीकरण तथा विभेदन करने की योग्यता


3.मौलिक तथा सर्जनात्मक चिंतन का उच्च स्तर


4.स्वतंत्र एवं अनुरूप प्रकार का चिंतन


5.लम्बी अवधी तक अकेला रहकर अध्ययन करने को वरीयता देना।


Q.अभिरुचि शब्द का अर्थ क्या हैं ?


ANS- आभरुचि :- अभिरुचि का अर्थ किसी व्यक्ति द्वारा दूसरी क्रियायों की अपेक्षा किसी एक अथवा एक से अधिक विशिष्ट क्रियायों में स्वयं को अधिक व्यस्त रखने की वरीयता से हैं।


Q.मूल्यांकन शब्द का क्या अर्थ हैं ?


ANS- मूल्यांकन किसी मनोवैज्ञानिक गुण को समझने का पहला चरण है। मूल्यांकन करने का अर्थ हैं व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक गुणों का मापन करने से हैं।


Q.प्राथमिक मानसिक योग्यताओ का सिद्धांत क्या हैं ?व्याख्या कीजिये


ANS- लुईस थर्स्टन ने प्राथमिक मानसिक योग्यताओ का सिद्धांत प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया की बुद्धि के अन्तर्गत सात प्राथमिक मानसिक योग्यताएं होती हैं , जो एक दूसरे से अपेक्षाकृत स्वतंत्र होकर कार्य करती हैं।

बुद्धि के अन्तर्गत सात मानसिक योग्यताएं होती हैं –

वाचिक बोधसं

ख्यात्मक योग्यता

देशिक सम्बद्ध

प्रत्यक्षिक गति

शब्द प्रवाह

स्मृति

आगमनात्मक तर्कना

Q.बुद्धि संरचना मॉडल की संक्षेप में चर्चा करे।

ANS- J . P गिल्फोर्ड ने बुद्धि संरचना मॉडल प्रस्तुत किया। जिसमे बौद्धिक विशेषताओं को तीन विमाओ में वर्गीकृत किया गया हैं। सक्रियांएं विषयवस्तु तथा उत्पाद। सक्रियाओं से तात्पर्य बुद्धि द्वारा की जाने वाली क्रियायों से हैं। विषय वस्तु का सम्बन्ध उस सामग्री या सूचना के स्वरुप से हैं , जिस पर व्यक्ति को बौद्धिक क्रियाएं करनी होती हैं। उत्पाद का अर्थ उस स्वरुप से हैं , जिसमे व्यक्ति सूचनाओ का प्रक्रमण करता हैं।

Q.बुद्धिमान व्यक्ति की विशेषता बतावें।

ANS- बुद्धिमान व्यक्ति की निम्नलिखित विशेषता होती हैं।

1.दूसरे व्यक्तियों के विभिन्न संवेगों को उनकी भाषा , आवाज और स्वरक तथा आनन अभिव्यक्तियों पर ध्यान देते भुए उसके प्रति संवेदनशील होना।

2.अपनी भवनाओ और संवेगो को जानना और उसके प्रति संवेदनशील होना।

3.अपने संवेगों को अपने विचारो से सम्बद्ध करना ताकि समस्या समाधान तथा निर्णय करते समय उन्हें ध्यान रखा जा सके।

4.अपने सावेगो की प्रकृति और त्रीवता के शक्तिशाली प्रभाव को समझना

5.अपने संवेगो और उनकी अभिव्यक्तियों को दूसरे से व्यवहार करते समय नियंत्रित करना ताकि शांति और सामंजस्य की प्राप्ति हो सके।

Q.प्रतिभा तथा प्रवीणता का क्या अर्थ हैं ?

ANS- प्रतिभा का अर्थ उस साधारण सामान्य प्रकार की योग्यता से हैं , जो विस्तृत क्षेत्र के कार्यों में किये गए श्रेष्ठ निष्पादन में दिखाई देता हैं। जबकि प्रवीणता का अर्थ किसी विशिष्ट अथवा संकुचित क्षेत्र में श्रेष्ठ योग्यता से होता हैं । अधिक प्रवीण व्यक्ति को कभी कभी अद्भुत प्रतिभाशाली भी कहा जाता हैं।



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